हास्य और व्यंग से भरपूर नाटक विकट पाहुन का मंचन
- CINE AAJKAL
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Updated: 4 hours ago
दिल्ली की अग्रणी नाट्य संस्था बारहमासा रंगमंडल द्वारा आयोजित, मुकेश झा द्वारा निर्देशित और प्रसिद्ध लेखक प्रो. हरिमोहन झा लिखित दो कहानियाँ 'तिरहुताम' और 'विकट पाहुन' आधारित कहानी का मंचन विश्व रंगमंच दिवस यानि 27 मार्च और 2 अप्रैल को नरेंनज्यांन स्टूडियो, भारती आर्टिस्ट कॉलोनी, विकास मार्ग, दिल्ली -110091 में किया गया । चरित्र निर्वहन करते मायानन्द झा, संतोष कुमार, राजीव रंजन, निर्भय एक परिपक्व अभिनेताक रूपमे दिखे, वहीं तरुण झा, केशव, और अन्य कलाकारकेँ अभिनय पक्ष पर और काम करने की है |

दोनों कहानियों के केन्द्र मे अतिथि सेवा है, जिसमें 'तिरहुताम' में गृहस्वामी द्वारा आग्रहपूर्वक बुलाकर अतिथि का आदर सत्कार और 'विकट पाहुन' में बिना बुलाए अतिथि का आना और पूर्ण अधिकार के साथ गृहस्वामीक घर के सभी वस्तुओं का उपभोग जैसे विषय को रखा गया था । तत्कालीन मैथिल समाजमे आतिथ्य सत्कारक का क्या महत्त्व था, उसी के विभिन्न पक्षों को समाहित करते हुए हास्य-व्यंग्य के मंच के माध्यम से उतनी ही रोचकता के साथ प्रस्तुत किया गया जीतने मनोयोग से हरिमोहन झाक रचना पढ़ैत को पढ़ते हुए आता है | राजेश कुमार “बेनी” की प्रकाश व्यवस्था और विक्रमादित्य का संगीत संचालन प्रस्तुति के अनुकूल रहा | रिंकेश कुमार झा और पुष्पा कुमारी का मंच प्रबंधन नाटक को सफल बनाने में कारगर रहा | दर्शकों में मैथिली भोजपुरी अकादमी के भूतपूर्व उपाध्यक्ष नीरज पाठक, मणिकान्त झा, अनूप मैथिल, मनीष झा बौआभाई, काश्यप कमल, रोहित त्रिपाठी समेत अनेक गण्यमान व्यक्तित्व उपस्थित थे | नीलेश दीपक ने मंच का संचालन किया |
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