सिहेक्ट मीडिया नई दिल्ली-
ज्योतिषाचार्या नमिता
सर्व कल्याणकारी संस्थान
आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि योगिनी एकादशी कहलाती है। शास्त्र अनुसार एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी निर्जला एकादशी के बाद व हरिशयन एकादशी से पहले आती है, अतः इसका बहुत अधिक महत्व है। योगिनी एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में समृद्धि और आनन्द की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। ये व्रत करना 88 हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने के तुल्य है।
एकादशी व्रत का पारण
एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना होता है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही हो तो ऐसी स्थिति में एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए। द्वादशी तिथि के दिन पारण न करना पाप करने के समान होता है।
हरि वासर
एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के समय भी नहीं करना चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि होती है। जो भक्त व्रत करते हैं, उन्हें व्रत खोलने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। व्रत खोलने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले भक्तों को मध्याह्न के समय व्रत खोलने से बचना चाहिए। यदि कोई भक्त प्रातःकाल पारण न कर पाए तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।
योगिनी एकादशी (24 जून 2022) के व्रत का पारण समय
25 जून 2022 - प्रातः 05:40 से 08:12 तक
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